“महाभारत” Mahabharat By: Swami Jagdishwaranand Sarswati

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महाभारत धर्म का विश्वकोष है । व्यास जी महाराज की घोषणा है कि ‘ जो कुछ यहां है , वही अन्यत्र है , जो यहां नहीं है वह कहीं नहीं है । इसकी महत्ता और गुरुता के कारण इसे पन्चम वेद भी कहा जाता है।

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महाभारत धर्म का विश्वकोष है । व्यास जी महाराज की घोषणा है कि ‘ जो कुछ यहां है , वही अन्यत्र है , जो यहां नहीं है वह कहीं नहीं है । इसकी महत्ता और गुरुता के कारण इसे पन्चम वेद भी कहा जाता है। लगभग 16000 श्लोकों में सम्पूर्ण महाभारत पूर्ण हुआ है । श्लोकों का तारतम्य इस प्रकार मिलाया गया है कि कथा का सम्बन्ध निरन्तर बना रहता है । इस पुस्तक में आप अपने प्राचीन गौरवमय इतिहास की , संस्कृति और सभ्यता की , ज्ञान – विज्ञान की , आचार – व्यवहार की झांकी देख सकते हैं । यदि आप भ्रातृप्रेम , नारी का आदर्श , सदाचार , धर्म का स्वरुप , गृहस्थ का आदर्श , मोक्ष का स्वरूप , वर्ण और आश्रमों के धर्म , प्राचीन राज्य का स्वरुप आदि के सम्बन्ध में जानना चाहते हैं तो एक बार इस ग्रन्थ को अवश्य पढ़ें ।

The great epic Mahabharta which is one of the noblest heritages of Hindu families has the honor of being the longest epic in world’s classical literature . It has been rightly claimed that ” whatever is there in Mahabharta may be found elsewhere ; but whatever is not here is nowhere else . This great epic of varied interests with its extraordinary length , its varied contents , its everlasting appeal and enduring freshness have been read , recited , enacted and told in stories throughout the length and breath of India and other countries since time immemorial .

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