ऋषि दयानंद प्रतिपादीत 8 गप्प तथा 8 सत्य – Rishi Dayanand Pratipadit 8 Gappe Tathe 8 Satya

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ऋषि दयानंद की दृष्टि में त्यागने योग्य आठ गप्प थीं ( 1 ) 18 पुराण ( 2 ) पाषाण पूजा , ( 3 ) शैव शाक्तादी संप्रदाय , ( 4 ) तंत्र ग्रंथ , ( 5 ) नशीली वस्तुसेवन , ( 6 ) व्यभिचार , ( 7 ) चोरी , ( 8 ) कपट , छल , अभिमान , मिथ्या भाषण आदि । और स्वीकार करने योग्य आठ सत्य हैं ( 1 ) वेदादि सत्यशास्त्र , ( 2 ) ब्रह्मचर्य पालन , ( 3 ) वेदोक्त वर्णाश्रम धर्म ( 4 ) पंच महायज्ञ , ( 5 ) शम , दम , 5 तप , आदि का सेवन , ( 6 ) विचार , विवके , वैराग्य ग्रहण , ( 7 ) काम , क्रोध , लोभ , मोह आदि का त्याग , ( 8 ) पंच क्लेशों से मुक्त होकर मोक्ष रूपी चरम लक्ष्य की प्राप्ति । ऋषि के इसी क्रांतिकारी चिंतन को डॉ . भवानीलाल भारतीय ने जो विस्तार दिया है वह पठनीय तथा अनुकरणीय है ।

This is an authentic book from the writer of about sixty books on life and works of Swami Dayananda Saraswati – Dr . Bhawanilal Bhartiya . The readers will get acquainted with the revolutionary ideological thoughts of Swami Dayananda through this book . While on his journey for the cause of Religion , Swami Dayananda expounded Eight baseless notions to be relinquished and Eight Truths to be adopted for peaceful living . The author has elaborated on these thoughts .

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ऋषि दयानंद की दृष्टि में त्यागने योग्य आठ गप्प थीं ( 1 ) 18 पुराण ( 2 ) पाषाण पूजा , ( 3 ) शैव शाक्तादी संप्रदाय , ( 4 ) तंत्र ग्रंथ , ( 5 ) नशीली वस्तुसेवन , ( 6 ) व्यभिचार , ( 7 ) चोरी , ( 8 ) कपट , छल , अभिमान , मिथ्या भाषण आदि । और स्वीकार करने योग्य आठ सत्य हैं ( 1 ) वेदादि सत्यशास्त्र , ( 2 ) ब्रह्मचर्य पालन , ( 3 ) वेदोक्त वर्णाश्रम धर्म ( 4 ) पंच महायज्ञ , ( 5 ) शम , दम , 5 तप , आदि का सेवन , ( 6 ) विचार , विवके , वैराग्य ग्रहण , ( 7 ) काम , क्रोध , लोभ , मोह आदि का त्याग , ( 8 ) पंच क्लेशों से मुक्त होकर मोक्ष रूपी चरम लक्ष्य की प्राप्ति । ऋषि के इसी क्रांतिकारी चिंतन को डॉ . भवानीलाल भारतीय ने जो विस्तार दिया है वह पठनीय तथा अनुकरणीय है ।

This is an authentic book from the writer of about sixty books on life and works of Swami Dayananda Saraswati – Dr . Bhawanilal Bhartiya . The readers will get acquainted with the revolutionary ideological thoughts of Swami Dayananda through this book . While on his journey for the cause of Religion , Swami Dayananda expounded Eight baseless notions to be relinquished and Eight Truths to be adopted for peaceful living . The author has elaborated on these thoughts .

Additional information

Weight 0.2 kg
Dimensions 21.59 × 13.97 cm
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